डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि (महापरिनिर्वाण दिवस) पर भाषण | Ambedkar Punyatithi Speech in Hindi

By Santosh kumar

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Ambedkar Punyatithi Speech : डॉ. भीमराव अम्बेडकर, जिन्हें प्यार से बाबासाहेब कहा जाता है, भारत के इतिहास में एक ऐसा नाम हैं जो अंधेरे में जलती हुई मशाल की तरह चमके। एक गरीब, अछूत परिवार में जन्मे उस बालक ने न केवल अपने बल पर विश्व की सर्वोच्च शिक्षा प्राप्त की, बल्कि लाखों-करोड़ों शोषित, वंचित और पीड़ित लोगों के लिए जीवन-पर्यंत लड़ाई लड़ी।

संविधान के शिल्पी, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता, क्रांतिकारी और सबसे बड़े मानवता के हक की लड़ाई के प्रतीक बाबासाहेब आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं जो समता और न्याय की बात करता है। अगर आप स्टूडेंट हैं या कहीं अन्य मंच से बाबा साहब के बारे में भाषण देना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए है।

Ambedkar Punyatithi Speech in Hindi

Ambedkar Punyatithi Speech in Hindi: अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर हिंदी में भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, प्रिय साथियों, और अन्य मंचासीन आगुन्तकों सभी को मेरा जय भीम

जैसा की हम जानते हैं आज 6 दिसंबर का दिन हमारे लिए केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक गहरे दर्द और अपार कृतज्ञता का दिन है। आज ही के दिन सन् 1956 में भारत रत्न, संविधान शिल्पी, दलितों-शोषितों के मसीहा, महामानव डॉ. भीमराव अम्बेडकर हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा हो गए थे। यह दिन उनके महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में जाना जाता है। यह दिन हमे याद दिलाता है कि जो एक महामानव सदियों की गुलामी और छुआछूत की काली रात में उम्मीद की किरण बनकर विश्वभर में चमका था।

साथियों, बाबासाहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को वर्तमान मध्य प्रदेश के महू में एक गरीब, अछूत कहे जाने वाले महार परिवार में हुआ। यह वह समय था जब अछूत समझे जाने वाले समाज के बच्चे को स्कूल में न शिक्षा दी जाती थी और न सार्वजानिक स्थान पर पानी तक नहीं पीने दिया जाता था, लेकिन उसी बच्चे ने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी उच्चतम शिक्षा प्राप्त की। कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बार-एट-लॉ और फिर डी.एससी की उपाधि प्राप्त की। यह उस समय अपने आप में एक चमत्कार था।

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लेकिन बाबासाहेब सिर्फ विद्वान नहीं थे; वे एक क्रांतिकारी योद्धा थे। उन्होंने मानवमात्र को अपमानित करने वाली मनुस्मृति को जलाया, छुआछूत के खिलाफ महाड़ सत्याग्रह किया, पूना पैक्ट के जरिए दलितों को अधिकार दिलाया और सबसे बड़ा काम किया; भारत के संविधान की रचना। हमारे संविधान की आत्मा में बाबासाहेब का खून बहता है। समता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय; ये चार शब्द सिर्फ शब्द नहीं, बाबासाहेब की जिंदगी की साधना हैं।

आज जब महिलाओं को वोट देने का अधिकार, आरक्षण की व्यवस्था, मजदूरों को 8 घंटे काम का कानून, हिंदू कोड बिल की बात करते हैं, तो याद रखें; इन सबके पीछे एक ही नाम है; डॉ. भीमराव अम्बेडकर।

दुर्भाग्य की बात है कि आज भी हमारे समाज में जातिवाद जिंदा है। ऊँच-नीच, छुआछूत, भेदभाव आज भी कहीं-कहीं सिर उठाता है। बाबासाहेब का सबसे बड़ा सपना था; एक ऐसा भारत जहाँ इंसान को इंसान की नजर से देखा जाए, जहाँ जन्म से नहीं, कर्म से पहचान बने।

प्रिय साथियों,
बाबासाहेब ने कहा था;
“मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता दे, जो समता दे, जो बंधुता दे।”
इसीलिए जीवन के अंतिम क्षणों में उन्होंने लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया।

आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर हम केवल श्रद्धांजलि नहीं दे रहे, बल्कि उनसे एक वचन ले रहे हैं। वचन यह कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलेंगे। हम किताबें पढ़ेंगे, क्योंकि बाबासाहेब कहते थे; “शिक्षित बनो!” हम अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे, क्योंकि वे कहते थे; “संघर्ष करो!” और सबसे बड़ी बात; हम इंसानियत को सबसे ऊपर रखेंगे, क्योंकि वे कहते थे; “आगरकर बनो, फुले बनो, लेकिन इंसान बनकर रहो!”

अंत में बस यही कहूँगा;
जय भीम! जय भारत! जय संविधान!

बाबासाहेब अमर रहें! बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिंद! जय भीम!!

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