Nadir Shah History: नादिर शाह एक महान योद्धा और लुटेरा था। 18वीं शताब्दी के ईरान के इस शक्तिशाली शासक ने अपनी सैन्य कुशलता से न केवल सफ़वीद साम्राज्य को पुनर्स्थापित किया, बल्कि अफगान, उस्मानी और मुगल साम्राज्य को भी चुनौती दी। नादिर शाह का इतिहास गुलाम से शाह तक प्रेरणादायक लेकिन रक्तरंजित दास्तान है। 1739 में नादिर शाह के भारत पर आक्रमण ने मुगल साम्राज्य की नींव हिला दी और दिल्ली में भयानक कत्लेआम की यादें आज भी ताजा हैं।
इस लेख में हम नादिर शाह के साम्राज्य, उसकी सैन्य विजयों, दिल्ली लूट और कत्लेआम के साथ उसकी विरासत पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि आप लुटेरे और हत्यारे नादिर शाह का इतिहास जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

Nadir Shah Brief Intro: नादिर शाह का त्वरित परिचय
| पूर्ण नाम | नादिर क़ुली बेग अफ़्शार (नादिर शाह अफ़्शार) |
| जन्म | 22 नवंबर 1688, दसब्त क़ल’एह, खोरासान प्रांत, ईरान (अफ़्शार कबीले में) |
| मृत्यु | 20 जून 1747, फतेहाबाद, खोरासान (अपने ही सैनिकों द्वारा हत्या) |
| शासनकाल | 1736-1747 (ईरान का शाह) |
| प्रमुख साम्राज्य | अफ़्शारिद वंश; ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, मध्य एशिया का बड़ा हिस्सा |
| धर्म | शिया इस्लाम |
| प्रसिद्ध युद्ध | दमावंद की लड़ाई (1729), करनाल की लड़ाई (1739), बगावर्द की लड़ाई (1735) |
| भारत आक्रमण | 1739; दिल्ली लूट, कोहिनूर हीरा और मयूर सिंहासन की लूट |
| उपलब्धियाँ | ईरानी प्रभुत्व की पुनर्स्थापना; दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना का गठन |
| विरासत | क्रूर शासक के रूप में जाना जाता; मुगल साम्राज्य के पतन का कारण |
Nadir Shah Early Life: नादिर शाह का प्रारंभिक जीवन
| नाम | नादिर शाह |
| जन्म | 22 नवंबर 1688 |
| जन्मस्थान | दसब्त क़ल’एह, खोरासान प्रांत, ईरान |
| पिता का नाम | इमाम कुली (चरवाहा, अफ़्शार कबीला) |
| माता | पेर्हान बेगम |
ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार युवावस्था में उज़्बेक आक्रमणकारियों ने नादिर और उनकी मां को कैद कर लिया। नादिर ने साहसपूर्वक भागकर खुद को आज़ाद किया और अफ़्शार कबीले में शामिल हो गया। यहां उसने चोरों के गिरोह का नेतृत्व किया और धीरे-धीरे एक कुशल योद्धा के रूप में बड़ा हुआ। उसने स्थानीय सरदार बाबा अली बेग की दो बेटियों से विवाह किया, जो उसकी सैन्य और सामाजिक स्थिति को ऊँचा करने में सहायक हुआ ।
नादिर एक असाधारण योद्धा था—वह घुड़सवारी, तीरंदाजी और तलवारबाजी में कुशल था। उसकी गहरी आवाज और नेतृत्व क्षमता ने उसे सैनिकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। हालांकि, वह अपने शत्रुओं के प्रति अत्यंत क्रूर था, जो बाद में उसके शासन की विशेषता बनी। नादिर शाह एक दास से ईरानी साम्राज्य का संस्थापक बन गया।
सफ़वीद साम्राज्य के साथ नादिर शाह का संबंध
18वीं शताब्दी के प्रारम्भ में ईरान का सफ़वीद साम्राज्य संकट में था। अफगान हॉतकी वंश ने 1722 में राजधानी इस्फ़हान पर अधिकार कर लिया, और शाह सुल्तान हुसैन को गद्दी से अपदस्थ दिया। ऐसे में शाह तहमास्प द्वितीय (सुल्तान हुसैन के पुत्र) ने नादिर को अपना सहायक बनाया।
नादिर ने अपनी सैन्य प्रतिभा का परिचय देते हुए 1726 में खोरासान के मशहद शहर को अफगानों से मुक्त कराया। इस सफलता के बाद उसे “तहमास्प क़ुली खान” की उपाधि मिली। 1729 तक उसनेअफगानों को तीन बार पराजित किया और इस्फ़हान को पुनः प्राप्त किया। नादिर ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए जानता से भारी कर वसूले, जिससे ईरानी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना बन गई।
उसने उस्मानी साम्राज्य और रूस के साथ भी युद्ध लड़े। 1730-1732 में उस्मानी युद्ध में विजयी होकर उसने काकेशस के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। हालांकि, तहमास्प द्वितीय से मतभेद होने पर नादिर ने 1732 में उसे सिंहासन से उतार दिया और उसके पुत्र अब्बास तृतीय को कठपुतली शाह बना दिया। 1736 में नादिर ने स्वयं शाह की उपाधि ग्रहण की और अफ़्शारिद वंश की स्थापना की। यह दौर नादिर शाह के साम्राज्य विस्तार का स्वर्णिम काल था।
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नादिर शाह का साम्राज्य विस्तार
नादिर शाह के साम्राज्य ने ईरान को सदियों बाद क्षेत्रीय महाशक्ति बना दिया। उसकी सेना में 3 लाख से अधिक सैनिक थे, जो तोपखाने और घुड़सवार सेना में निपुण थे। प्रमुख विजयें इस प्रकार हैं:
- अफगान युद्ध (1729-1738): कंधार पर कब्जा, अफगानिस्तान का पूर्ण नियंत्रण।
- उस्मानी युद्ध (1730-1736): बगावर्द की लड़ाई में विजय, इराक और सीरिया के हिस्सों पर अधिकार।
- रूसी युद्ध (1732): डागिस्तान और जॉर्जिया से रूस को पीछे हटाया।
- दागिस्तानी विद्रोह (1741-1743): कठिन युद्धों के बाद नियंत्रण स्थापित।
नादिर शाह का भारत आक्रमण (1739)
औरंगजेब की मृत्यु 1707 के बाद मुग़ल साम्राज्य पतन की ओर अग्रसर था। इस स्थिति से परिचित नादिर शाह ने भारत आक्रमण किया और मुगल साम्राज्य के पतन में और वृद्धि की। 1738 में कंधार पर अधिकार के बाद उसने बहाना बनाया कि मुगल अफगान भगोड़ों को शरण दे रहे हैं। जनवरी 1739 में काबुल पर कब्जा कर वह पेशावर पहुंचा।
24 फरवरी 1739 को हरियाणा के करनाल में मुगल बादशाह मुहम्मद शाह से भयंकर युद्ध हुआ। नादिर की 55,000 सैनिकों वाली सेना ने मुग़लों की 3 लाख की सेना को मात्र 3 घंटों में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। दिल्ली पहुंचने पर अफवाहें फैलीं कि नादिर मारा गया, जिससे शहरवासियों ने ईरानी सैनिकों पर हमला कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद नादिर ने 22 मार्च 1739 को दिल्ली में कत्लेआम का आदेश दिया—लगभग 20,000-30,000 स्त्री-पुरुष और बच्चे मारे गए।
मयूर सिंहासन की लूट और कोहिनूर
नादिर शाह को लूट में विश्व पप्रसिद्ध कोहिनूर हीरा, मयूर सिंहासन (पीकॉक थ्रोन) और अरबों रुपये का खजाना हासिल हुआ था। मुहम्मद शाह ने सिंधु नदी के पश्चिमी क्षेत्र नादिर को सौंप दिए। इस लूट से नादिर को इतना धन मिला कि 3 वर्षों तक उसने ईरान की जनता से कर न वसूला। यह घटना नादिर शाह की दिल्ली लूट के नाम से कुख्यात है और मुगल साम्राज्य को स्थायी क्षति पहुंचाई।
नादिर शाह की मृत्यु
नादिर का अंतिम वर्ष क्रूरता से भरा था। दागिस्तानी युद्धों में पराजय और मानसिक असंतुलन ने उसे पागल बना दिया। उसने अपने ही पुत्र रेजा को अंधा करवा दिया। 20 जून 1747 को फतेहाबाद में नादिर के सैनिकों ने उसे सोते जन्नत में भेज दिया।
नादिर की अस्थियां मशहद में दफन हैं, जहां 19वीं शताब्दी में काजर वंश ने भव्य मकबरा बनवाया। नादिर शाह की विरासत मिश्रित है—वह ईरान का अंतिम महान विजेता माना जाता है, लेकिन उसकी क्रूरता ने साम्राज्य को विघटित कर दिया। आज ईरान में उसे “दूसरा सिकंदर” कहा जाता है।

नादिर शाह से जुड़े रोचक तथ्य
नादिर शाह के रोचक तथ्य उनकी असाधारण जीवनशैली को उजागर करते हैं। यहां कुछ चुनिंदा तथ्य दिए गए हैं:
- दुनिया का सबसे बड़ा लूटेरा: दिल्ली की लूट से प्राप्त धन इतना था कि यह आज के मूल्य में अरबों डॉलर के बराबर है।
- अजेय सेना: नादिर की सेना कभी हारी नहीं, सिवाय उसकी मृत्यु के बाद।
- धार्मिक नीति: उसने सुन्नी और शिया एकता का प्रयास किया, लेकिन बाद में शिया मजबूत किए।
- व्यक्तिगत जीवन: चार विवाह और कई संतानें; उसका सबसे बड़ा पुत्र रेजा क़ुली मिर्जा युद्ध में मारा गया।
- प्रभाव: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में प्रवेश का अवसर मिला, क्योंकि मुगल कमजोर हो गए।
- उपनाम: “फारस का नेपोलियन” या “ईरानी चंगेज” के नाम से प्रसिद्ध।
निष्कर्ष
नादिर शाह का इतिहास साहस, महत्वाकांक्षा और क्रूरता का मिश्रण है। उसने ईरान को मजबूत किया, लेकिन उसकी नीतियों ने क्षेत्रीय अस्थिरता को जन्म दिया। आज भी इतिहासकार उसे एक जटिल व्यक्तित्व मानते हैं। आपको यह लेख कैसा लगा कमेंट में बताएं।
नादिर शाह से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
नादिर शाह कौन था और उसका जन्म कब हुआ?
नादिर शाह अफ़्शार ईरान का एक महान शासक और लूटेरा था, उसका जन्म 1688 में खोरासान में हुआ। वह दासता से उठकर शाह बना।
नादिर शाह ने भारत पर कब और क्यों आक्रमण किया?
1739 में नादिर शाह ने मुगल साम्राज्य पर आक्रमण किया और करनाल की लड़ाई में विजयी होकर दिल्ली लूटी।
क्या नादिर शाह ने कोहिनूर हीरा लूटा था?
हां, दिल्ली लूट के दौरान कोहिनूर हीरा, मोर सिंहासन और अन्य रत्न उनके हाथ लगे, जो ईरान ले जाया गया।
नादिर शाह की मृत्यु कैसे हुई?
1747 में उसके ही सैनिकों ने क्रांति कर उसकी हत्या कर दी, क्योंकि उसकी क्रूरता असहनीय हो गई थी।
नादिर शाह का साम्राज्य कितना बड़ा था?
उसके साम्राज्य में आधुनिक ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और मध्य एशिया का बड़ा हिस्सा शामिल था।







