Guru Gobind Singh Jayanti: गुरु गोविंद सिंह जयंती सिख समुदाय के साथ सम्पूर्ण भारत के लिए एक पावन अवसर है, जो शौर्य, समानता और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। 2025 में यह जयंती 27 दिसंबर को मनाई जा रही है, जो पौष मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर आधारित है। इस दिन गुरुद्वारों में कीर्तन, अखाड़ों में नृत्य और सामूहिक भोज का आयोजन होता है।
यदि आप गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन की प्रेरणा से जुड़ना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहां हम उनके जीवन परिचय, बचपन, प्रसिद्धि, बलिदान और जयंती के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही, 2025 की तिथि, सरकारी छुट्टी और प्रेरक सन्देश भी साझा करेंगे।

Guru Gobind Singh Intro: कौन थे गुरु गोविंद सिंह जी? जीवन परिचय
गुरु गोविंद सिंह जी सिख धर्म के दसवें और अंतिम मानव गुरु थे, जिन्होंने सिख पंथ को एक संगठित शक्तिशाली सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित संगठित किया। उनका जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब (बिहार) में हुआ था। बचपन का नाम गोविंद राय था। वे न केवल एक महान योद्धा थे, बल्कि कवि, दार्शनिक और लेखक भी थे। उन्होंने दसम ग्रंथ की रचना की, जो सिख साहित्य का महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
गुरु जी का जीवन संघर्षों से भरा था। उन्होंने मुगल शासकों के अत्याचारों के खिलाफ 14 युद्ध लड़े और धर्म की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। उनका निधन 7 अक्टूबर 1708 को हुआ, लेकिन उनकी शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं।
गुरु गोविंद सिंह जी का बचपन और माता-पिता
गुरु गोविंद सिंह जी का बचपन पटना साहिब में बीता, जहां वे धार्मिक वातावरण में पले-बढ़े। उनके पिता श्री गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे, जो धर्म की रक्षा के लिए अपना सिर कुर्बान करने वाले महान संत थे। माता का नाम माता गुजरी जी, जो एक धर्मपरायणा महिला थीं, जिन्होंने गोविंद राय को बचपन से ही वीरता और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी।
बचपन में ही गोविंद राय को शस्त्र विद्या, घुड़सवारी, कविता और भाषाओं का ज्ञान हुआ। मात्र 9 वर्ष की आयु में उनके पिता के बलिदान के बाद वे दसवें गुरु बने। आनंदपुर साहिब में स्थानांतरित होने के बाद उन्होंने कई भाषाओं जैसे संस्कृत, फारसी और उर्दू में महारत हासिल की। उनका बचपन दादा गुरु हरगोबिंद सिंह जी के सैन्य जीवन से प्रेरित था, जिसने उन्हें योद्धा बनाया।
गुरु गोविंद सिंह जी क्यों प्रसिद्ध हैं? प्रमुख योगदान
गुरु गोविंद सिंह जी की प्रसिद्धि उनके अदम्य साहस और सामाजिक सुधारों से जुड़ी है। वे खालसा पंथ के संस्थापक थे, जिसकी स्थापना 1699 में बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में हुई। इस पंथ ने सिखों को ‘सिंह‘ और ‘कौर‘ उपनाम देकर समानता का संदेश दिया।
- समानता का प्रचार: उन्होंने जाति-भेदभाव को समाप्त कर सभी को एक समान माना।
- साहित्यिक योगदान: दसम ग्रंथ, जाप साहिब और चंडी दी वार जैसी रचनाओं से सिख साहित्य को समृद्ध किया।
- योद्धा संत: मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए उन्होंने ‘राज करेगा खालसा‘ का उद्घोष किया, जो आज भी प्रेरणा स्रोत है।
उनकी प्रसिद्धि इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने कमजोरों की रक्षा के लिए तलवार उठाई, लेकिन शांति को प्राथमिकता दी।

गुरु गोविंद सिंह जी का योगदान: एक अमर गाथा
गुरु जी का जीवन बलिदानों की मिसाल है। उनके पिता गुरु तेग बहादुर जी को औरंगजेब द्वारा 1675 में दिल्ली में सिर कलम कर दिया गया। फिर, उनके चारों पुत्रों (साहिबजादों) का बलिदान हुआ:
- अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह – चमकौर और सरहिंद की जंगों में शहीद।
स्वयं गुरु जी ने 14 युद्ध लड़े, जिसमें चमकौर की लड़ाई प्रसिद्ध है, जहां उन्होंने ‘सवा लाख से एक लड़ाऊं’ का उद्घोष किया। उनका बलिदान धर्म, न्याय और स्वतंत्रता के लिए था, जो आज भी युवाओं को साहस देता है।
गुरु गोविंद सिंह जयंती कब और क्यों मनाई जाती है?
गुरु गोविंद सिंह जयंती पौष शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है, जो उनके जन्मदिन का प्रतीक है। यह उत्सव इसलिए मनाया जाता है ताकि उनके शिक्षाओं – साहस, सेवा, समानता और भक्ति – को याद किया जाए। सिख समुदाय में अखाड़ों की परेड, गुरबानी पाठ और लंगर का आयोजन होता है। यह दिन हमें शिक्षा देता है कि धर्म की रक्षा के लिए कभी पीछे न हटें।
2025 में गुरु गोविंद सिंह जयंती कब है? 27 दिसंबर 2025 (शनिवार) को। नानकशाही कैलेंडर के अनुसार कुछ जगहों पर 6 जनवरी को भी मनाई जाती है, लेकिन पारंपरिक रूप से 27 दिसंबर ही मुख्य है।
गुरु गोविंद सिंह जयंती 2025 पर सरकारी छुट्टी है क्या?
हां, 2025 में गुरु गोविंद सिंह जयंती पर कई राज्यों में सरकारी छुट्टी घोषित की गई है। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में स्कूल, कॉलेज, बैंक और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। यह छुट्टी सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने के लिए है। केंद्रीय स्तर पर यह वैकल्पिक अवकाश है, लेकिन राज्यवार पुष्टि करें।
गुरु गोविंद सिंह जी के प्रेरणादायक उपदेश और कोट्स

गुरु जी के उपदेश जीवन को दिशा देते हैं। यहां कुछ प्रमुख कोट्स हैं:
| उपदेश | अर्थ |
|---|---|
| सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं | धर्म के लिए साहस से लड़ना, संख्या से नहीं। |
| साच कहों सुन लेह सभी, जिन प्रेम कियो तिन ही प्रभ पायो | प्रेम से ही ईश्वर प्राप्ति। |
| मानस की जात सबै एकै पहचानबो | सभी मनुष्य समान हैं। |
| चूं कार अज हमह हीलते दर गुजश्त, हलाल अस्त बुरदन ब शमशीर दस्त | न्याय के लिए तलवार वैध। |
| देहि शिवा बरु मोहि इहै, सुभ करमन ते कभुं न टरों | शुभ कर्म से कभी न हटना। |
गुरु गोविंद सिंह जयंती 2025 की शुभकामनाएं और संदेश
इस पावन पर्व पर अपनों को शुभकामनाएं भेजें। यहां कुछ चुनिंदा संदेश हैं:
- धर्म, शौर्य और बलिदान के अद्भुत प्रतीक दसम पातशाह गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं।
- राज करेगा खालसा, बाकी रहे न कोए। वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह! गुरु गोबिंद सिंह जयंती की मंगलकामनाएं।
- सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियों से बाज लड़ाऊं। तभी गोबिंद सिंह नाम कहाऊं। वीरता और आत्मबल के प्रतीक गुरु जी को नमन, जयंती की शुभकामनाएं।
- गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाएं आपके जीवन में साहस, सत्य और निस्वार्थ सेवा का मार्ग प्रशस्त करें। गुरुपर्व की शुभेच्छाएं।
- गुरु साहिब का दिव्य प्रकाश आपके जीवन से हर अंधकार दूर करे और सुख-शांति का मार्ग दिखाए। प्रकाश पर्व की बधाई।
निष्कर्ष: गुरु गोविंद सिंह जी की विरासत
गुरु गोविंद सिंह जयंती 2025 हमें उनके बलिदान और शिक्षाओं से जोड़ती है। उनके जीवन से सीखें – साहस से जीना, समानता मानना और न्याय के लिए खड़ा होना। इस अवसर पर गुरुद्वारों का दर्शन करें और परिवार के साथ उत्सव मनाएं। वाहेगुरु की कृपा आप पर बनी रहे!
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