Mahaparinirvan Day 2025 : डॉ. भीमराव आंबेडकर, जिन्हें दुनिया बाबासाहेब के नाम से पुकारती है, एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने सदियों पुरानी जातिगत बेड़ियों को तोड़ने का सपना देखा। उनके लाखों अनुयायी मानते हैं कि उनके नेक कार्यों और बौद्ध दर्शन की राह पर चलने से उन्होंने जीवनकाल में ही आध्यात्मिक मुक्ति हासिल कर ली थी। इसलिए, 6 दिसंबर 1956 को उनका देहांत होने वाली तिथि को हम ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ के रूप में मनाते हैं।
यह दिन न सिर्फ उनकी पुण्यतिथि है, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवता की ललकार का प्रतीक भी है। बाबासाहेब ने दलितों, महिलाओं और गरीबों के लिए जीवन भर संघर्ष किया, छुआछूत के खिलाफ आवाज बुलंद की और भारतीय संविधान को समावेशी भारत का आधार बनाया। आज, 2025 में उनके 69वें महापरिनिर्वाण दिवस पर, आइए उनके इन 10 प्रेरणादायी विचारों को अपनाकर और शेयर करके उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दें। ये विचार न सिर्फ प्रेरणा देते हैं, बल्कि हमें एक बेहतर समाज की ओर ले जाते हैं।

बाबासाहेब के 10 प्रेरक विचार – महापरिनिर्वाण दिवस विशेष: Mahaparinirvan Day 2025
- न्याय हमेशा समानता की जड़ें मजबूत करता है। यह विचार हमें याद दिलाता है कि सच्चा न्याय तभी संभव है जब हर इंसान को बराबरी का हक मिले, बिना किसी भेदभाव के।
- जीवन की लंबाई से ज्यादा इसकी महानता मायने रखती है, और ज्ञान ही इसका आधार है। बाबासाहेब का यह संदेश सिखाता है कि छोटा लेकिन प्रभावशाली जीवन ही सार्थक होता है – बस शिक्षा को हथियार बनाओ।
- सच्ची आजादी मन की आजादी में छिपी है। बाहरी बंधनों से मुक्ति आसान है, लेकिन अंदरूनी गुलामी (जैसे भय या पूर्वाग्रह) से लड़ना ही असली स्वतंत्रता है।
- मैं वही धर्म अपनाता हूं जो आजादी, बराबरी और भाईचारे का पाठ पढ़ाए। बौद्ध धर्म अपनाने वाले बाबासाहेब का यह कथन बताता है कि धर्म विभाजन नहीं, एकता का माध्यम होना चाहिए।
- भाग्य की बजाय कड़ी मेहनत और कर्म पर भरोसा करो। सफलता ऊपर से नहीं टपकती; यह संघर्ष और लगन से ही आती है – बाबासाहेब का जीवन इसका जीता-जागता प्रमाण है।
- अगर संविधान का गलत इस्तेमाल हो रहा हो, तो मैं खुद इसे आग के हवाले कर दूंगा। संविधान को पवित्र मानने वाले बाबासाहेब का यह बयान चेतावनी देता है कि मूल्यों का दुरुपयोग कभी बर्दाश्त न हो।
- महात्मा आए-गए, लेकिन अछूत आज भी वही अछूत बने हुए हैं। यह कटाक्ष सामाजिक सुधारों की सतहीपन पर था – बाबासाहेब ने असल बदलाव के लिए जड़ों तक लड़ाई लड़ी।
- संविधान सिर्फ वकीलों की किताब नहीं, बल्कि जिंदगी जीने का तरीका है। बाबासाहेब ने इसे आम लोगों का हथियार बनाया, जो रोजमर्रा के न्याय की गारंटी देता है।
- जन्म से मृत्यु तक, हम सिर्फ एक भारतीय हैं। जाति या धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है।
- शिक्षा पुरुषों जितनी जरूरी है, उतनी ही महिलाओं के लिए भी। लैंगिक समानता के प्रणेता बाबासाहेब का यह विचार महिलाओं को सशक्त बनाने का आह्वान है।
इन विचारों को सोशल मीडिया पर शेयर करें, व्हाट्सएप पर भेजें या दोस्तों के साथ चर्चा करें – इससे न सिर्फ बाबासाहेब को श्रद्धांजलि मिलेगी, बल्कि उनके सपनों का भारत एक कदम आगे बढ़ेगा। याद रखें, बाबासाहेब ने कहा था: “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो!” आइए, इस महापरिनिर्वाण दिवस पर यही संकल्प लें।
जय भीम! जय भारत! जय संविधान!
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