10 Lines on Mahaparinirvan Diwas in hindi : हर साल 6 दिसंबर का दिन हमारे लिए बहुत खास होता है, क्योंकि इसी दिन हम भारत माता के सच्चे सपूत, संविधान के निर्माता और लाखों शोषितों के मसीहा डॉ. भीमराव आंबेडकर को स्मरण करते हैं। प्यार से बाबासाहेब कहे जाने वाले इस महान व्यक्तित्व ने अपना पूरा जीवन इस बात के लिए समर्पित कर दिया कि हमारे देश में हर व्यक्ति को बराबरी और सम्मान मिले।
1956 में इसी दिन उनका महापरिनिर्वाण हुआ था, इसलिए हम इसे “महापरिनिर्वाण दिवस” के नाम से जानते हैं। इस साल (2025) हम उनकी 69वीं पुण्यतिथि मना रहे हैं। अगर आप भाषण या निबंध की तैयारी कर रहे हैं, तो नीचे दी गई 10 मौलिक पंक्तियाँ आपके बहुत काम आएंगी।

महापरिनिर्वाण दिवस पर 10 आसान और दिल से लिखी हुई पंक्तियाँ : 10 Lines on Mahaparinirvan Diwas
- हर साल 6 दिसंबर का दिन हमारे लिए बहुत खास है, क्योंकि इसी दिन हम बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को सच्चे दिल से याद करते हैं और श्रद्धांजलि देते हैं।
- इस दिन को हम “महापरिनिर्वाण दिवस” कहते हैं, क्योंकि सन् 1956 में इसी तारीख को बाबासाहेब हमसे हमेशा के लिए दूर चले गए।
- बाबासाहेब ने पूरी जिंदगी यही सपना देखा था कि हमारे देश में हर इंसान बराबर हो, किसी को ऊँच-नीच की नजर से न देखा जाए।
- उन्होंने जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ जीवन भर लड़ाई लड़ी और लाखों लोगों को अपने हक की आवाज उठाना सिखाया।
- बाबासाहेब बेहतरीन विद्वान, अर्थशास्त्री, वकील और सबसे बड़े समाज सुधारक थे, जिन्होंने हमें समता का रास्ता दिखाया।
- भारतीय संविधान को बनाने का सबसे बड़ा श्रेय बाबासाहेब को ही जाता है; वो इसके असली जनक और शिल्पी हैं।
- उनके इसी महान काम के लिए 1990 में उन्हें मरणोपरांत “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया।
- इस साल (2025) हम बाबासाहेब की 69वीं पुण्यतिथि मना रहे हैं और उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प फिर से लेते हैं।
- गाँव हो या शहर, स्कूल हो या चौपाल, हर जगह लोग नीली किताब थामकर और नीला झंडा लहराकर “जय भीम” बोलते हैं।
- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर आम इंसान तक, सब अपने-अपने तरीके से बाबासाहेब को नमन करते हैं और कहते हैं – “जय भीम, जय भारत!”
महापरिनिर्वाण दिवस क्यों मनाते हैं?
हम यह दिन इसलिए मनाते हैं ताकि बाबासाहेब के सामाजिक न्याय, बराबरी और गरीब-शोषित लोगों के लिए किए गए संघर्ष को कभी भूलें नहीं। उन्होंने कानून बनाए, शिक्षा का दरवाजा खोला और जाति के जहर को खत्म करने की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी। 6 दिसंबर हमें याद दिलाता है कि अभी उनका सपना पूरा नहीं हुआ है, हमें अभी और मेहनत करनी है।
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6 दिसंबर के दिन का क्या महत्व है?
6 दिसंबर को संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. बी.आर. आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है। उनका 1956 में निधन हो गया था। यह दिन महत्वपूर्ण है भारत का संविधान बनाने की बाबासाहेब की लगातार कोशिशों की याद दिलाता है। इसके आलावा महिलाओं और शोषितों तथा बंचितों की लड़ाई लड़ने वाले महामानव को याद करने का अहम् दिन है।
बाबासाहेब अमर हैं, उनके विचार अमर हैं। जय भीम! जय संविधान!







