Mahaparinirvan Diwas 2025: क्या आप जानते हैं कल क्या है? कल सुबह जैसे ही सूरज निकलेगा, और आप जागोगे तब पूरा देश नीला हो जाएगा। मुंबई की चैत्यभूमि पर लाखों लोग जमा होंगे, दिल्ली में संसद के बाहर नेता सिर झुकाएंगे, गाँव-गाँव में नीली पताकाएँ लहराएंगी और बच्चे और बड़े “जय भीम” नारा लगाते नजर आएंगे। जी हाँ ये वो दिन है जब इस दुनिया से दलितों और महिलाओं का मुक्तिदाता रुखसत हुआ। ये दिन कोई साधारण पुण्यतिथि नहीं है – ये बाबासाहेब अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है।
2025 में उनकी 70वीं पुण्यतिथि है और ये इस बार शनिवार को मनाया जायेगा। इस बार का दिन और भी विशेष है क्योंकि लोग सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं देने वाले, बल्कि उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प लेने वाले हैं। सवाल बहुत हैं कि क्या जैसा संविधान में वर्णिंत है सरकार उसी के अनुसार काम करती हैं या अपनी इच्छानुसार? क्ज़ैर इस लेख में हम बाबासाहेब अंबेडकर के महारिनिर्वाण दिवस की चर्चा कर रहे हैं। चलिए शुरू करते हैं—–

| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर |
| जन्म | 14 अप्रैल 1891 |
| जन्म स्थान | महू कैंट, मध्य प्रदेश (अब डॉ. अंबेडकर नगर) |
| जाति | महार (अनुसूचित जाति) |
| माता | भीमाबाई सकपाल |
| पिता | रामजी मालोजी सकपाल (ब्रिटिश आर्मी में सूबेदार) |
| पहली पत्नी | रमाबाई अंबेडकर (1906–1935) |
| दूसरी पत्नी | डॉ. सविता अंबेडकर (शादी: 15 अप्रैल 1948) |
| शिक्षा | BA, MA, PhD (कोलंबिया), MSc, DSc (लंदन), बैरिस्टर (ग्रे’स इन) |
| मुख्य पद | भारत के पहले कानून मंत्री, संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष |
| बौद्ध धर्म दीक्षा | 14 अक्टूबर 1956, नागपुर (6 लाख लोगों के साथ) |
| महापरिनिर्वाण | 6 दिसंबर 1956, दिल्ली |
| भारत रत्न | 1990 (मरणोपरांत) |
| सबसे प्रसिद्ध नारा | “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” |
| सबसे मशहूर किताबें | जाति का विनाश, बुद्ध और उनका धम्म, रुपये की समस्या |
| सबसे बड़ा योगदान | भारतीय संविधान की रचना + दलितों-महिलाओं-मजदूरों को अधिकार दिलाना |
| प्रतीक रंग | नीला (Blue) |
| मुख्य स्मारक | चैत्यभूमि (मुंबई), दीक्षा भूमि (नागपुर), महू (जन्मस्थान), प्रेरणा स्थल (दिल्ली) |
अंबेडकर का प्रारम्भिक जीवन और संघर्ष
14 अप्रैल 1891, महू कैंट (मध्य प्रदेश)। एक महार परिवार (उस समय अछूत समझा जाता था) में सबसे छोटा बेटा पैदा हुआ – जिसका नाम नाम रखा गया भीमराव। उनके पिता रामजी सकपाल ब्रिटिश आर्मी में सूबेदार के पद पर थे, फिर भी समाज उन्हें अछूत मानता था। स्कूल में भीमराव को स्कूल में अलग बिठाते थे, पानी का घड़ा छूने नहीं देते थे, किताबें छूने पर डाँट पड़ती थी।
इतना भेदभाव और छुआछूत देखकर भीम ने ठान लिया था – वह पढ़ेगा और इतना पढ़ेगा कि दुनिया को जवाब देगा। और ऐसा किया भी। बॉम्बे, न्यूयॉर्क, लंदन – कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से दो डॉक्टरेट, ग्रे’स इन से बैरिस्टरी। उस जमाने में जब ज्यादातर लोग गाँव से बाहर नहीं निकलते थे, बाबासाहेब दुनिया घूमकर ज्ञान वो ज्ञान ले आए जिसे आज भी प्राप्त करना सिर्फ एक सपना है।
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1924 में उन्होंने ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ बनाई और वो नारा दिया जो आज भी हमारे खून में दौड़ता है –
“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।”
अंबेडकर ने रमाबाई के साथ पहली शादी की, रमाबाई की मृत्यु के बाद 1948 में डॉ. सविता अंबेडकर (ब्राह्मण) से दूसरा विवाह किया। मधुमेह और न्यूरोपैथी बाबा साहब के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला, लेकिन उनकी कलम कभी नहीं रुकी। 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में वो हमेशा के लिए इस संसार से विदा हो गए। 1990 में भारत रत्न मिला – देर से, पर मिला।
Mahaparinirvan Diwas: महापरिनिर्वाण का अर्थ
महापरिनिर्वाण शब्द सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बौद्ध धर्म में ये सबसे ऊँची अवस्था है – जब सारे दुख, सारी पीड़ा खत्म हो जाती है।1935 के येवला सम्मेलन में बाबासाहेब ने वो ऐतिहासिक घोषणा की थी –
“मैं हिंदू पैदा हुआ, ये मेरी मजबूरी थी, लेकिन हिंदू मरूँगा नहीं।”
फिर 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षा भूमि पर नीला सूट पहने, 6 लाख अनुयायियों के सामने 22 प्रतिज्ञाएँ लेकर बौद्ध धर्म ग्रहण किया। सिर्फ 52 दिन बाद वो महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए। तभी से हम 6 दिसंबर को दुख नहीं, उनकी जीत का उत्सव मनाते हैं। हालाँकि उनका जाना दुःखद था, मगर जो उन्होंने भारत और उसकी जनता के लिए किया वो उनकी अमर विरासत है।

बाबासाहेब ने समाज को क्या-क्या दिया?
| क्षेत्र | क्या किया बाबासाहेब ने? | आज हम क्या जी रहे हैं? |
|---|---|---|
| सामाजिक सुधार | महाड सत्याग्रह (1927), पूना पैक्ट (1932), मंदिर प्रवेश आंदोलन, “जाति का विनाश” किताब लिखी | पानी पीने का हक, आरक्षण, अस्पृश्यता पर कानून |
| संविधान | प्रारूप समिति के अध्यक्ष, अनुच्छेद 14-18, 17 (अस्पृश्यता उन्मूलन), महिलाओं को समान अधिकार | समानता का अधिकार, वोट का अधिकार, कानून के सामने सब बराबर |
| अर्थशास्त्र-श्रम | RBI की नींव, 8 घंटे काम, न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, हड़ताल का अधिकार | आज की सैलरी, छुट्टियाँ, यूनियन – सब बाबा साहब की देन है |
| राजनीति | पहले कानून मंत्री, शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन, रिपब्लिकन पार्टी | हमारी राजनीतिक आवाज |
| बौद्ध आंदोलन | 1956 में 6 लाख लोगों के साथ दीक्षा, “बुद्ध और उनका धम्म” किताब | लाखों लोग आज बौद्ध हैं, जाति से मुक्ति का रास्ता |
बाबा साहब ने 20 से ज्यादा किताबें लिखीं। “राजनीतिक स्वतंत्रता के बिना सामाजिक-आर्थिक स्वतंत्रता व्यर्थ है” – ये उनका वो कथन है जो आज भी सरकारों को आईना दिखाता है।
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2025 में कल क्या-क्या होने वाला है?
- मुंबई: चैत्यभूमि पर सुबह 4 बजे से लाइन लगना शुरू होगी। BMC ने भारी इंतजाम किए – वाटरप्रूफ पंडाल, मेडिकल कैंप, स्पेशल ट्रेनें। रेलवे ने 12 अतिरिक्त लोकल लगाई और सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात किए है।
- दिल्ली: प्रेरणा स्थल पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सारे बड़े नेता श्रद्धांजलि देंगे।
- महाराष्ट्र: सरकारी अवकाश, इंदू मिल में प्रस्तावित भव्य स्मारक का शिलान्यास संभव।
- महू, नागपुर, देहू रोड, सागर, हरदा – हर जगह रैलियाँ, सेमिनार, नीले झंडे के साथ भीड़।
इस दिन को कैसे खास बनाएँ?
- उनकी कोई किताब खोलकर 10-20 पेज जरूर पढ़ें
- मोहल्ले में किसी गरीब बच्चे को किताब-कॉपी दे दें
- घर में बच्चों को उनकी कहानी सुनाएँ – कैसे एक “अछूत” बच्चा दुनिया का सबसे बड़ा विद्वान बना
- सोशल मीडिया पर सिर्फ फोटो नहीं, उनकी कोई बात लिखें
- शाम को परिवार के साथ “जय भीम” बोलकर दीप जलाएँ
बाबासाहेब ने कहा था –
“जीवन लंबा होने से ज्यादा जरूरी है कि वो महान हो।”
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- संविधान के प्रमुख वास्तुकार: डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर भारत के संविधान के मुख्य रचनाकार थे, जिन्होंने 1946-1949 के दौरान संविधान सभा में नेतृत्व किया और सात सदस्यों वाली प्रारूप समिति की अध्यक्षता की।
- संविधान पूरा होने पर चेतावनी: 25 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम पाठ पर उन्होंने कहा, “26 जनवरी 1950 को हम विरोधाभासों भरे जीवन में प्रवेश करेंगे – राजनीतिक रूप से समानता, लेकिन सामाजिक-आर्थिक जीवन में असमानता बनी रहेगी।”
- लोकतंत्र पर कटु टिप्पणी: उन्होंने लोकतंत्र को “भारतीय भूमि का केवल ऊपरी पोशाक” बताया और गाँवों को “स्थानीयता का गंदा नाला, अज्ञानता, संकीर्णता और सांप्रदायिकता का घर” कहा।
- दलितों के लिए संघर्ष: दलित समुदाय के नेता के रूप में छुआछूत खत्म करने, वंचितों के लिए सकारात्मक कार्रवाई (आरक्षण), सभी वयस्कों को वोट का अधिकार और समान अधिकार सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।
- प्रारूप समिति का नेतृत्व: 395 प्रावधानों वाले संविधान मसौदे को तैयार किया; समिति के 7 में से 5 सदस्य उच्च जाति के थे, फिर भी सबने उन्हें नेतृत्व सौंपा।
- अंतरराष्ट्रीय समर्थन: आयरिश नेता इमोन डी वलेरा ने उनके नाम की सिफारिश की; वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन और पीएम नेहरू ने समर्थन दिया; एडविना माउंटबेटन ने कहा, “वे इकलौते प्रतिभाशाली हैं जो हर वर्ग को न्याय दे सकते हैं।“
- शारीरिक पीड़ा सहकर काम: डायबिटीज और ब्लड प्रेशर से जूझते हुए संविधान सभा में लगभग 100 दिनों तक खड़े होकर हर खंड समझाया और संशोधनों को खारिज किया।
- संशोधनों का सिलसिला: मसौदे पर 7,500 से ज्यादा संशोधन सुझाए गए, जिनमें से 2,500 स्वीकार किए; मुख्य श्रेय सीनियर सिविल सेवक एसएन मुखर्जी को दिया।
- खारिज हुई मांगें: अल्पसंख्यकों के लिए अलग निर्वाचक मंडल, बुनियादी उद्योगों का राष्ट्रीयकरण और संविधान के उद्देश्यों में ‘समाजवाद’ शब्द जोड़ने की उनकी मांगें ठुकराई गईं।
- पहली बैठक में चिंता: 6 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में कहा, “हम राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बंटे हुए हैं – लड़ते हुए खेमों का समूह हैं।”
- निधन और नेहरू की श्रद्धांजलि: 63 वर्ष की आयु में 6 दिसंबर 1956 को निधन; पीएम नेहरू ने कहा, “संविधान बनाने में अम्बेडकर से ज्यादा ध्यान किसी ने नहीं दिया, न ही उतनी परेशानी उठाई।”
बाबा साहब ने अपना जीवन इतना महान कर दिया कि 70 साल बाद भी देश उनकी दिखाई रोशनी में चल रहा है। कल नीला दुपट्टा बाँध लो, नीली टोपी लगा लो, और दिल से बोलो –
जय भीम… जय भारत!
महापरिनिर्वाण दिवस से जुड़े कुछ प्रश्न
1. महापरिनिर्वाण दिवस क्यों मनाया जाता है?
महापरिनिर्वाण दिवस हर साल 6 दिसंबर को डॉ. भीमराव आंबेडकर (बाबासाहेब) की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उनके सामाजिक न्याय, समानता, बंधुत्व और संविधान निर्माण जैसे योगदानों को याद करना है। बाबासाहेब ने 1956 में बौद्ध धर्म अपनाया था, और उनके अनुयायी मानते हैं कि उनके सदाचारी जीवन और कार्यों से उन्होंने ‘निर्वाण’ प्राप्त कर लिया था। इसलिए, उनकी मृत्यु को ‘महापरिनिर्वाण’ कहकर श्रद्धांजलि दी जाती है। इस दिन देशभर में स्मृति सभाएं, सेमिनार और पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो जातिवाद उन्मूलन और समावेशी समाज की प्रेरणा देते हैं।
2. महापरिनिर्वाण दिन क्या है?
महापरिनिर्वाण दिन डॉ. बी.आर. आंबेडकर की 6 दिसंबर 1956 को हुई मृत्यु की याद में मनाया जाने वाला विशेष दिवस है। यह ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ के नाम से जाना जाता है, जो बौद्ध परंपरा से लिया गया है। इस दिन बाबासाहेब को ‘बोधिसत्व’ (आध्यात्मिक गुरु) के रूप में सम्मान दिया जाता है। कार्यक्रमों में उनके विचारों पर चर्चा होती है, जैसे शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और दलित उत्थान। 2025 में यह उनकी 69वीं पुण्यतिथि है, और संसद भवन से लेकर चैत्यभूमि (मुंबई) तक श्रद्धांजलि सभाएं हो रही हैं।
3. डॉ. भीमराव अंबेडकर पर भाषण कैसे शुरू करें?
डॉ. आंबेडकर पर भाषण शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है श्रोताओं का अभिवादन और उनके योगदान का एक प्रेरक संदर्भ देना। उदाहरण के लिए:
“आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों, नमस्कार! आज हम एक ऐसे महामानव को याद कर रहे हैं, जिन्होंने अंधेरे में उम्मीद की किरण जलाई – भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर। उनका जन्म एक गरीब दलित परिवार में हुआ, लेकिन उन्होंने संविधान जैसा अमूल्य उपहार देकर हमें समानता का पाठ पढ़ाया।”
फिर, उनके संघर्ष (जैसे छुआछूत के खिलाफ सत्याग्रह) या विचार (“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”) पर 2-3 मुख्य बिंदु जोड़ें। भाषण को 3-5 मिनट रखें, सरल भाषा इस्तेमाल करें और अंत में “जय भीम! जय भारत!” से समाप्त करें। अभ्यास करें ताकि भावनात्मक जुड़ाव बने।
बाबा साहब के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-FAQ
बाबासाहेब अंबेडकर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (इंदौर के पास) में हुआ था। उस समय महू को “महू कैंट” कहते थे।
अंबेडकर जी की मृत्यु कब और कैसे हुई?
6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुई। वो लंबे समय से डायबिटीज और नसों की बीमारी से पीड़ित थे। शांतिपूर्वक नींद में ही चले गए।
बाबासाहेब के माता-पिता का नाम क्या था?
पिता – रामजी मालोजी सकपाल (ब्रिटिश आर्मी में सूबेदार)
माता – भीमाबाई सकपाल
वो 14 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे, सिर्फ वही और उनके 2-3 भाई-बहन ही जिंदा बचे।
अंबेडकर जी की दोनों पत्नियों का नाम क्या था?
पहली पत्नी – रमाबाई (शादी 1906, निधन 1935)
दूसरी पत्नी – डॉ. सविता अंबेडकर (ब्राह्मण थीं, शादी 1948 में हुई, पहले नाम शारदा कबीर)
बाबासाहेब ने कब और कहाँ बौद्ध धर्म अपनाया?
14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षा भूमि पर, लगभग 6 लाख लोगों के साथ 22 प्रतिज्ञाएँ लेकर बौद्ध बने।
अंबेडकर जी को भारत रत्न कब मिला?
31 जनवरी 1990 को मरणोपरांत मिला (राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने दिया)।
बाबासाहेब की सबसे मशहूर किताबें कौन-सी हैं?
जाति का विनाश (Annihilation of Caste)
बुद्ध और उनका धम्म
रुपये की समस्या
कौन थे शूद्र?
6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस क्यों कहते हैं?
क्योंकि बौद्ध धर्म में मृत्यु के बाद पूर्ण मुक्ति को “महापरिनिर्वाण” कहते हैं। बाबासाहेब ने बौद्ध धर्म अपना लिया था, इसलिए उनकी पुण्यतिथि को ये नाम दिया गया।
अंबेडकर जी ने संविधान में सबसे बड़ा योगदान क्या दिया?
वो संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे। समानता (अनुच्छेद 14-18), अस्पृश्यता खत्म करना (अनुच्छेद 17), आरक्षण और मौलिक अधिकार – ज्यादातर उनकी कलम से निकले।
बाबासाहेब का पूरा नाम क्या था?
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर
(परिवार का मूल गाँव सतारा जिले का अंबाडवे था, इसलिए सरनेम अंबेडकर पड़ा)







