World War I History: आधुनिक विश्व इतिहास में रक्तरंजित घटनाओं में सबसे बड़ा घटनाक्रम प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के रूप में सामने आया। यूरोप में बढे साम्राज्वाद और हटियारों की होड़ ने सम्पूर्ण विश्व को अपने प्रभाव में ले लिया। 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया के राजकुमार Archduke Franz Ferdinand की हत्या को बीसवीं सदी के विश्व इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।
ऑस्ट्रो-हंगेरियन राजगद्दी के उत्तराधिकारी आर्चड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड और उनकी पत्नी सोफी की साराजेवो में गैवरिलो प्रिंसिप ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसी घटना ने प्रथम विश्व युद्ध की नींव रखी। इस लेख में हम प्रथम विश्व युद्ध के कारण, घटंनाएं, परिणाम के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। लेख के अंत में प्रथम विश्व युद्ध से संबंधित 50 MCQ की एक प्रश्नोत्तरी भी दी गई है जिससे आप अपने ज्ञान को बढ़ा सकते हैं।

| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| युद्ध का प्रारंभ | 28 जुलाई 1914 (ऑस्ट्रिया-हंगरी द्वारा सर्बिया पर युद्ध की घोषणा) |
| युद्ध का कारण | मुख्य कारण: साम्राज्यवाद, राष्ट्रवाद, सैन्यवाद, गठबंधन प्रणाली और बाल्कन संकट; ट्रिगर: 28 जून 1914 को आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनैंड की हत्या |
| युद्ध के गठबंधन | मित्र राष्ट्र (एलाइड पॉवर्स): फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, इटली (1915 से), अमेरिका (1917 से) आदि; केंद्रीय शक्तियां: जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन साम्राज्य, बुल्गारिया |
| परिणाम | मित्र राष्ट्रों की जीत; वर्साय की संधि; जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, रूस और ऑटोमन साम्राज्यों का विघटन; लीग ऑफ नेशंस की स्थापना |
| हताहत | कुल मौतें: लगभग 16-22 मिलियन (सैन्य: 9-11 मिलियन, नागरिक: 6-13 मिलियन); घायल: लगभग 23 मिलियन |
| कितने दिन चला | 4 वर्ष, 3 महीने, 14 दिन (1,568 दिन) |
| कितने सैनिक शामिल हुए | कुल सैन्य कर्मी: लगभग 67 मिलियन (मित्र: 42.9 मिलियन, केंद्रीय: 25.2 मिलियन) |
| समाप्त कब हुआ | 11 नवंबर 1918 (आर्मिस्टिस) |
| किसने प्रथम विश्व युद्ध नाम दिया | जर्मन जीवविज्ञानी अर्न्स्ट हैकल |
World War I Introduction: प्रथम विश्व युद्ध का परिचय
प्रथम विश्व युद्ध, जिसे महायुद्ध, ग्रेट वॉर या “युद्ध जो सभी युद्धों को समाप्त करेगा” कहा गया, मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था। यह युद्ध 28 जुलाई 1914 को प्रारम्भ हुआ और 11 नवंबर 1918 को समाप्त हुआ, कुल चार वर्ष, तीन महीने और 14 दिन तक चला। इस संघर्ष में दो प्रमुख गठबंधनों – मित्र राष्ट्र (Allied Powers) और केंद्रीय शक्तियाँ (Central Powers) – के बीच वैश्विक स्तर पर टकराव हुआ। युद्ध मुख्य रूप से यूरोप में केंद्रित था, लेकिन इसका प्रभाव अफ्रीका, मध्य पूर्व, एशिया, प्रशांत महासागर और अटलांटिक तक देखा गया। यह पहला युद्ध था जिसमें आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ, जैसे मशीन गन, टैंक, विमान, पनडुब्बी और रासायनिक हथियार।
इस युद्ध में कुल 70 मिलियन से अधिक सैनिकों ने भाग लिया, जिनमें से लगभग 1.6 से 1.7 करोड़ लोग मारे गए। इनमें 90 लाख सैनिक और 70-80 लाख नागरिक शामिल थे। घायलों की संख्या 2.1 से 2.3 करोड़ थी। युद्ध के दौरान फैली स्पेनिश फ्लू महामारी ने अकेले 1.7 से 5 करोड़ लोगों की जान ली, जो युद्ध से अलग एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट था। आर्थिक नुकसान की बात करें तो कुल लागत 330 बिलियन अमेरिकी डॉलर (उस समय की कीमत में) आंकी गई, जो आज के मूल्य में ट्रिलियन डॉलर में होगी।
युद्ध से पहले इसे “अंतिम युद्ध” माना गया था, लेकिन वास्तव में यह द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) की नींव साबित हुआ। 1914 में ही जर्मन जीवविज्ञानी अर्न्स्ट हैकल ने इसे “प्रथम विश्व युद्ध” नाम दिया, जो बाद में आधिकारिक हो गया। यह युद्ध चार बड़े साम्राज्यों – जर्मन, ऑस्ट्रो–हंगेरियन, रूसी और ओटोमन – के पतन का कारण बना और विश्व की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संरचना को हमेशा के लिए बदल दिया।

World War I Causes: प्रथम विश्व युद्ध क्यों शुरू हुआ?
दीर्घकालिक कारण: यूरोपीय राष्ट्र शक्ति असंतुलन
19वीं सदी के अंत तक यूरोप में “कॉन्सर्ट ऑफ यूरोप” नामक शक्ति संतुलन था, जो 1815 की वियना कांग्रेस के बाद स्थापित हुआ था। लेकिन जर्मनी का एकीकरण (1871) और ओटो वॉन बिस्मार्क की आक्रामक नीतियों ने इसे बिगाड़ दिया। फ्रांस 1871 के फ्रैंको–प्रुशियन युद्ध में एल्सेस–लोरेन क्षेत्र हार चुका था और बदला लेना चाहता था। ब्रिटेन अपनी “स्प्लेंडिड आइसोलेशन” नीति पर चल रहा था, लेकिन जर्मनी की नौसेना विस्तार नीति से चिंतित था।
उपनिवेशवाद की अंधी होड़ भी महत्वपूर्ण कारण थी। अफ्रीका और एशिया में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के बीच “स्क्रैम्बल फॉर अफ्रीका“(अफ्रीका के लिए संघर्ष) चल रहा था। 1884-85 के बर्लिन सम्मेलन ने अफ्रीका को बांट दिया, लेकिन असंतोष बना रहा। राष्ट्रवाद का उदय, विशेषकर बाल्कन में, स्लाव लोगों को ऑस्ट्रिया–हंगरी के शासन से मुक्त करना चाहता था।
सैन्य गठबंधन: ट्रिपल एलायंस और ट्रिपल एंटेंट
सैन्य गठबंधन युद्ध का प्रमुख कारण बने। 1879 में जर्मनी और ऑस्ट्रिया-हंगरी ने डुअल एलायंस बनाया। 1882 में इटली शामिल हुआ और यह ट्रिपल एलायंस बन गया। इसके जवाब में फ्रांस और रूस ने 1894 में गठबंधन किया। 1904 में ब्रिटेन–फ्रांस एंटेंट कॉर्डियल और 1907 में एंग्लो–रूसी समझौता हुआ, जिससे ट्रिपल एंटेंट बना। ये गठबंधन “डोमिनो इफेक्ट” का कारण बने – एक देश का युद्ध में शामिल होना दूसरों को खींच लेता था।
| युद्ध के गठबंधन | मित्र राष्ट्र: ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, अमेरिका; केंद्रीय: जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी |
हथियारों की होड़: नौसेना और सेना विस्तार
जर्मनी के कैसर विल्हेल्म द्वितीय और एडमिरल अल्फ्रेड वॉन टिर्पिट्ज़ ने ब्रिटिश रॉयल नेवी को चुनौती देने के लिए ड्रेडनॉट-क्लास युद्धपोत बनवाए। 1898 से 1914 तक जर्मनी की नौसेना बजट 400% बढ़ी। ब्रिटेन ने जवाब में और जहाज बनाए। थल सेनाओं में भी होड़ थी – 1914 तक जर्मनी की सेना 80 लाख सैनिकों तक पहुंचने की योजना बना रही थी। 1908-1913 के बीच यूरोपीय सैन्य खर्च 50% से अधिक बढ़ा।
बाल्कन संकट: यूरोप का बारूद का ढेर
बाल्कन को “यूरोप का बारूद का ढेर” कहा जाता था। 1908 में ऑस्ट्रिया-हंगरी ने बोस्निया-हर्ज़ेगोविना पर कब्जा किया, जिससे सर्बिया क्रोधित हुआ। 1912-13 के बाल्कन युद्धों में सर्बिया, ग्रीस, बुल्गारिया और मॉन्टेनेग्रो ने ओटोमन साम्राज्य को हराया और क्षेत्र दोगुना कर लिया। लेकिन ऑस्ट्रिया इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता था। रूस पैन-स्लाववाद के तहत सर्बिया का समर्थन करता था।
साराजेवो हत्याकांड: युद्ध की तत्काल चिंगारी
28 जून 1914 को साराजेवो में ऑस्ट्रिया-हंगरी के उत्तराधिकारी आर्कड्यूक फ्रांज़ फर्डिनेंड और उनकी पत्नी सोफी की हत्या हुई। हत्यारा 19 वर्षीय गैवरिलो प्रिंसिप बोस्नियाई सर्ब था और यंग बोस्निया संगठन का सदस्य। संगठन को सर्बिया की ब्लैक हैंड (यूनिफिकेशन ऑर डेथ) ने हथियार और प्रशिक्षण दिया। हत्या के बाद ऑस्ट्रिया ने जर्मनी से “ब्लैंक चेक” समर्थन लिया और 23 जुलाई को सर्बिया को 10 शर्तों वाला अल्टीमेटम दिया। सर्बिया ने 9 शर्तें मानीं, लेकिन आंतरिक जांच की अनुमति देने से इनकार किया।
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युद्ध का प्रारंभ: जुलाई संकट और युद्ध घोषणाएँ
28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया पर युद्ध घोषित किया और बेलग्रेड पर गोले बरसाए। रूस ने स्लाव भाइयों की रक्षा के लिए आंशिक मोबिलाइजेशन शुरू किया, फिर 30 जुलाई को पूर्ण। जर्मनी ने रूस को 31 जुलाई को 12 घंटे में डी-मोबिलाइज करने की चेतावनी दी, लेकिन रूस ने मना किया। 1 अगस्त को जर्मनी ने रूस पर युद्ध घोषित किया। श्लिफेन प्लान के तहत जर्मनी ने फ्रांस पर हमला करने के लिए बेल्जियम पर आक्रमण किया। बेल्जियम की तटस्थता की गारंटी देने के कारण ब्रिटेन 4 अगस्त को जर्मनी पर युद्ध घोषित कर दिया। इस तरह एक स्थानीय संकट वैश्विक युद्ध बन गया।
युद्ध में शामिल देश: मित्र राष्ट्र और केंद्रीय शक्तियाँ
| गठबंधन | मुख्य देश और प्रवेश वर्ष |
|---|---|
| मित्र राष्ट्र | सर्बिया (1914), रूस (1914), फ्रांस (1914), बेल्जियम (1914), ब्रिटिश साम्राज्य (ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भारत – 1914), जापान (1914), इटली (1915), पुर्तगाल (1916), रोमानिया (1916), संयुक्त राज्य अमेरिका (1917), ग्रीस (1917), चीन (1917), ब्राजील (1917) |
| केंद्रीय शक्तियाँ | ऑस्ट्रिया-हंगरी (1914), जर्मनी (1914), ओटोमन साम्राज्य (1914), बुल्गारिया (1915) |
कुल 32 देश मित्र राष्ट्रों के साथ और 4 केंद्रीय शक्तियों के साथ थे।

युद्ध की प्रमुख घटनाएँ: मोर्चे और निर्णायक लड़ाइयाँ
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918): प्रमुख लड़ाइयाँ और ट्रेंच युद्ध
| घटना / लड़ाई | विवरण |
|---|---|
| श्लिफेन प्लान (1914) | जर्मनी की तेज़ जीत की रणनीति: बेल्जियम से होते हुए पेरिस पर 6 सप्ताह में कब्ज़ा। लेकिन मार्ने की पहली लड़ाई में असफल। |
| मार्ने की पहली लड़ाई (5-12 सितंबर 1914) | फ्रांसीसी सेनाओं ने जर्मनों को 70 किमी पीछे धकेला। श्लिफेन प्लान विफल → “रेस टू द सी” शुरू → ट्रेंच युद्ध की शुरुआत। |
| ट्रेंच युद्ध (1914-1918) | 700 किमी लंबी खाइयाँ: फ्लैंडर्स (बेल्जियम) से स्विट्जरलैंड तक। सैनिक कीचड़, चूहे, रोग, गोले और तारों के बीच रहते थे। |
| वर्डुन की लड़ाई (21 फरवरी – 18 दिसंबर 1916) | जर्मनी की “खून बहाकर मारो” रणनीति। 10 महीने, 70 लाख गोले, ~3 लाख मरे। फ्रांस ने “Ils ne passeront pas!” (वे नहीं गुजरेंगे!) के साथ बचाव किया। |
| सोम्मे की लड़ाई (1 जुलाई – 18 नवंबर 1916) | इतिहास का सबसे खूनी दिन: 1 जुलाई को ब्रिटेन के 57,470 हताहत (19,240 मरे)। कुल ~10 लाख हताहत। टैंक का पहला प्रयोग। |
| पाशेंडेल की लड़ाई (1917) | भारी बारिश → कीचड़ का समुद्र। हजारों सैनिक कीचड़ में डूबे। ब्रिटिश जीत, लेकिन भारी कीमत पर। |
पूर्वी मोर्चा: रूसी संघर्ष
टैनेनबर्ग की लड़ाई (26-30 अगस्त 1914) में जर्मनी ने रूस को हराया, 1.5 लाख रूसी बंदी। मासुरियन झीलों (सितंबर 1914) में और हार। लेकिन रूस ने गैलिशिया पर कब्जा किया। 1916 का ब्रूसिलोव आक्रमण (जून-सितंबर) रूस की सबसे बड़ी सफलता थी – 10 लाख ऑस्ट्रियाई हताहत, लेकिन रूस को भी 10 लाख नुकसान।
दक्षिणी मोर्चे: गैलिपोली और मध्य पूर्व
गैलिपोली अभियान (1915-16) में ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड (ANZAC) ने ओटोमन को हराने की कोशिश की, लेकिन मुस्तफा कमाल अतातुर्क की कमान में 2.5 लाख हताहत के बाद पीछे हटे। मेसोपोटामिया में कुट-अल-अमारा (1916) में ब्रिटेन हारा, लेकिन 1917 में बगदाद जीता। अरब विद्रोह (1916-18) में लॉरेंस ऑफ अरेबिया ने ओटोमन रेलवे उड़ाई।
इटालवी मोर्चा
इटली 1915 में मित्र राष्ट्रों में शामिल हुआ। इज़ोंज़ो नदी पर 11 लड़ाइयाँ (1915-17) हुईं, 10 लाख लोग हताहत। कैपोरेटो (अक्टूबर 1917) में जर्मनी-ऑस्ट्रिया ने इटली को 40 किमी पीछे धकेला, 3 लाख बंदी बने।

समुद्री युद्ध
ब्रिटेन की नाकाबंदी ने जर्मनी को भुखमरी की कगार पर ला दिया। जटलैंड की लड़ाई (31 मई 1916) अनिर्णीत रही – ब्रिटेन 14 जहाज, जर्मनी 11 जहाज खोए। जर्मनी की अनियंत्रित पनडुब्बी युद्ध (1917) ने 5000 जहाज डुबोए, लेकिन अमेरिका को युद्ध में खींच लिया। लुसिटानिया (1915) में 128 अमेरिकी मारे गए।
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युद्ध में तकनीकी नवाचार
प्रथम विश्व युद्ध में तकनीकी नवाचारों ने युद्ध की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया और आधुनिक युद्ध की नींव रखी। टैंक का सबसे पहला युद्धक्षेत्र उपयोग 15 सितंबर 1916 को सोम्मे की लड़ाई में ब्रिटिश सेना ने किया, जब मार्क I टैंक (जिन्हें “लिटिल विली” भी कहा जाता था) मैदान में उतारे गए। ये 28 टन भारी, रोम्बॉइड आकार के वाहन थे जो कंटीले तारों को कुचल सकते थे, खाइयों को पार कर सकते थे और मशीनगन की गोलियों से सुरक्षित थे। हालांकि पहले दिन केवल 49 में से 36 टैंक ही चले और कई खराब हो गए, फिर भी इनका मनोवैज्ञानिक प्रभाव गहरा था – जर्मन सैनिक इन्हें “डेविल्स चैरियट” कहकर डरते थे।
विमान युद्ध भी इस युद्ध में नया था। शुरू में विमान केवल टोही (reconnaissance) के लिए इस्तेमाल होते थे – दुश्मन की स्थिति देखने और फोटो खींचने के लिए। लेकिन जल्द ही हवाई लड़ाई शुरू हुई। जर्मनी के मैनफ्रेड वॉन रिचथोफेन उर्फ “रेड बैरन” ने 80 हवाई जीत हासिल कीं और युद्ध के सबसे प्रसिद्ध पायलट बने। ब्रिटेन ने सिंक्रोनाइज़्ड मशीनगन विकसित की जो प्रोपेलर के बीच से गोली चला सकती थी, जिससे हवाई युद्ध और घातक हो गया। बाद में बमबारी विमान (जैसे जर्मन गोथा बॉम्बर) ने लंदन पर हमले किए, जिससे पहली बार नागरिक क्षेत्रों पर हवाई हमले हुए।
सबसे भयावह नवाचार था रासायनिक हथियारों का प्रयोग। 22 अप्रैल 1915 को यप्रेस (बेल्जियम) में जर्मनी ने पहली बार क्लोरीन गैस छोड़ी – हरी-पीली जहरीली धुंध हवा में फैली, जिससे फ्रांसीसी और अल्जीरियाई सैनिक दम घुटने से तड़पकर मरे। इसके बाद फॉस्जीन और सबसे खतरनाक मस्टर्ड गैस (1917) का इस्तेमाल हुआ, जो त्वचा, आँखें और फेफड़े जला देती थी। कुल मिलाकर रासायनिक हथियारों से 1.3 मिलियन सैनिक घायल हुए और लगभग 90,000 मारे गए। गैस मास्क अनिवार्य हो गए, लेकिन ये अक्सर अप्रभावी साबित होते थे।
इसके अलावा पनडुब्बी युद्ध (U-boat), फ्लेमथ्रोअर, हैंड ग्रेनेड का बड़े पैमाने पर प्रयोग, वायरलेस संचार, और रेलगन जैसी तकनीकों ने युद्ध को और जटिल व विनाशकारी बना दिया। ये सभी नवाचार युद्ध को लंबा खींचने और हताहतों को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार थे, साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध की तकनीकी तैयारी भी इन्हीं से हुई।

युद्ध के परिणाम: 1917-1918 के निर्णायक मोड़
1917 में अमेरिका का युद्ध में प्रवेश – खेल बदल देने वाला कदम
ज़िमरमैन टेलीग्राम (जनवरी 1917): जर्मनी के विदेश मंत्री आर्थर ज़िमरमैन ने मेक्सिको को गुप्त तार भेजा – यदि अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ तो मेक्सिको को टेक्सास, न्यू मैक्सिको और एरिज़ोना वापस दिलाने का प्रस्ताव। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने तार इंटरसेप्ट कर अमेरिका को सौंप दिया।
अमेरिकी जनमत उबाल: अनियंत्रित पनडुब्बी युद्ध (U-boat) से अमेरिकी जहाज़ डूबोए जा रहे थे। टेलीग्राम लीक होने से अमेरिका में जर्मनी-विरोधी भावना चरम पर।
6 अप्रैल 1917: अमेरिकी कांग्रेस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने इसे “विश्व को लोकतंत्र के लिए सुरक्षित बनाने” का युद्ध कहा।
20 लाख अमेरिकी सैनिक: 1918 तक 1 मिलियन सैनिक यूरोप पहुँचे। ताज़ा, प्रशिक्षित और संसाधनपूर्ण – इन्होंने थके हुए मित्र राष्ट्रों में नई जान फूँकी।
रूस का युद्ध से बाहर होना – पूर्वी मोर्चे का खुलना
फरवरी क्रांति (मार्च 1917, जूलियन कैलेंडर): पेट्रोग्राड में भोजन संकट, हड़तालें → ज़ार निकोलस द्वितीय का त्याग। अस्थायी सरकार बनी, लेकिन युद्ध जारी रखा।
अक्टूबर क्रांति (नवंबर 1917): लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने सत्ता हथिया ली। नारा: “रोटी, शांति, ज़मीन”।
ब्रेस्ट-लिटोवस्क संधि (3 मार्च 1918): रूस ने जर्मनी से अलग शांति संधि की। पोलैंड, यूक्रेन, बाल्टिक राज्य छोड़े → जर्मनी को 78 लाख सैनिक मुक्त हुए, जिन्हें पश्चिमी मोर्चे पर भेजा गया।
1918: जर्मनी का अंतिम दाँव – स्प्रिंग ऑफेंसिव
21 मार्च – 5 अप्रैल (ऑपरेशन माइकल): 63 डिवीज़न का हमला → ब्रिटिश लाइनों को तोड़ा, सोम्मे क्षेत्र फिर खोया।
अप्रैल-जून: अमियंस, लिस नदी तक पहुँचे। पेरिस से सिर्फ 56 किमी दूर → पेरिस पर लंबी दूरी की “पेरिस गन” से गोले बरसाए।
अमेरिकी प्रतिरोध: जनरल पर्शिंग की कमान में अमेरिकी डिवीज़न ने कैंटिग्नी (28 मई) और बेलो वुड (जून) में जर्मनों को रोका। टैंक और ताज़ा सैनिक निर्णायक।
हंड्रेड डेज़ ऑफेंसिव (8 अगस्त – 11 नवंबर 1918) – मित्र राष्ट्रों की अंतिम विजय
8 अगस्त: अमियंस की लड़ाई – “जर्मन सेना का काला दिन” (लुडेंडॉर्फ)। 456 टैंक, कनाडाई-ऑस्ट्रेलियाई हमला → 27,000 जर्मन कैदी।
सेंट मिहिएल (सितंबर): पहली पूरी अमेरिकी कमान वाली लड़ाई → जर्मन सैलियेंट खत्म।
हिंडनबर्ग लाइन तोड़ी: अक्टूबर में मित्र सेनाएँ जर्मनी की अंतिम रक्षा पंक्ति भेदीं।
सहयोगी साम्राज्यों का पतन:
29 सितंबर: बल्गारिया आत्मसमर्पण → दक्षिणी मोर्चा खुला।
30 अक्टूबर: ओटोमन साम्राज्य (मुद्रोस आर्मिस्टिस)।
3 नवंबर: ऑस्ट्रिया-हंगरी (विला गिउस्ती आर्मिस्टिस)।
जर्मनी में क्रांति और समर्पण
कील नौसैनिक विद्रोह (29 अक्टूबर): नौसैनिकों ने अंतिम हमले से इनकार किया → विद्रोह पूरे जर्मनी में फैला।
9 नवंबर: कैसर विल्हेल्म द्वितीय नीदरलैंड भागा। जर्मनी में गणतंत्र घोषित।
11 नवंबर 1918, सुबह 11 बजे: कॉम्पिएन वन (फ्रांस) में रेल डिब्बे में आर्मिस्टिस पर हस्ताक्षर। युद्ध समाप्त।
परिणाम: 4 साल, 3 महीने, 14 दिन बाद युद्ध खत्म। जर्मनी पराजित, लेकिन “पीठ में छुरा” मिथक जन्मा → द्वितीय विश्व युद्ध की बीज।
युद्ध के बाद की स्थिति: साम्राज्यों का पतन और नए राष्ट्र
चार साम्राज्य समाप्त: जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन, रूसी, ओटोमन। नए देश बने: पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, यूगोस्लाविया, फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, हंगरी, ऑस्ट्रिया। तुर्की गणराज्य (1923) बना। मध्य पूर्व में ब्रिटेन-फ्रांस मैंडेट: सीरिया, लेबनान, इराक, फिलिस्तीन।
पेरिस शांति सम्मेलन (1919) और वर्साय संधि – पूर्ण विवरण
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| पेरिस शांति सम्मेलन | जनवरी 1919 – जनवरी 1920 विजयी मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, इटली) का सम्मेलन। वुड्रो विल्सन (14 सूत्र), क्लेमेंसो (कठोर दंड), लॉयड जॉर्ज (मध्यम) के बीच मतभेद। |
| वर्साय संधि पर हस्ताक्षर | 28 जून 1919 – वर्साय पैलेस के मिरर हॉल में। ठीक 5 साल बाद सराजेवो हत्या की तारीख पर। जर्मनी को बुलाया नहीं गया, केवल हस्ताक्षर करवाए गए। |
| अनुच्छेद 231 (War Guilt Clause) | जर्मनी और उसके सहयोगियों पर युद्ध का पूरा नैतिक और कानूनी दोष। आधार: क्षतिपूर्ति वसूलने का। जर्मनी में इसे अपमानजनक माना गया। |
| क्षेत्रीय नुकसान |
|
| सैन्य प्रतिबंध |
|
| आर्थिक क्षतिपूर्ति | 132 बिलियन गोल्ड मार्क (लगभग $442 बिलियन आज के मूल्य में) केवल 20 बिलियन मार्क चुकाए (1921 तक) 1921 में लंदन शेड्यूल: 2 बिलियन वार्षिक + निर्यात का 26% हाइपरइन्फ्लेशन (1923) का कारण। |
| जर्मनी में प्रतिक्रिया |
|
राष्ट्र संघ का निर्माण: शांति की असफल कोशिश
वुड्रो विल्सन के 14 पॉइंट्स में राष्ट्र संघ शामिल था। 10 जनवरी 1920 को स्थापना, मुख्यालय जेनेवा। उद्देश्य: युद्ध रोकना, निर्ःशस्त्रीकरण, विवाद सुलझाना। लेकिन अमेरिका सीनेट ने अस्वीकार किया। दांतहीन संगठन साबित हुआ – जापान मंचूरिया (1931), इटली इथियोपिया (1935) पर कब्जा किया, लेकिन रोक नहीं सका।
हताहत और प्रभाव: मानवीय व आर्थिक क्षति
सैन्य हताहत (लगभग):
| पक्ष | मारे गए | घायल | बंदी/लापता |
|---|---|---|---|
| मित्र राष्ट्र | 55 लाख | 1.2 करोड़ | 40 लाख |
| केंद्रीय शक्तियाँ | 40 लाख | 85 लाख | 35 लाख |
सर्बिया: 1.3 लाख सैनिक + 80 लाख नागरिक (25% आबादी)। आर्मीनियाई नरसंहार: 10-15 लाख। स्पेनिश फ्लू: 5 करोड़।
आर्थिक: ब्रिटेन 10 बिलियन पाउंड खर्च, अमेरिका का कर्जदार। जर्मनी हाइपरइन्फ्लेशन (1923)। महिलाएँ फैक्ट्री में आईं, मताधिकार मिला (ब्रिटेन 1918, अमेरिका 1920)।
निष्कर्ष: प्रथम विश्व युद्ध की विरासत
प्रथम विश्व युद्ध ने आधुनिक युद्ध की भयावहता दिखाई। इसने साम्यवाद, फासीवाद, नाजीवाद की नींव रखी। तकनीक ने युद्ध बदला, लेकिन मानवता की कीमत चुकानी पड़ी। स्मारक जैसे मेनिन गेट (90,000 नाम), थिएपवल (72,000), अनजान सैनिक की कब्रें याद दिलाती हैं। विल्फ्रेड ओवेन की कविता “डल्स एट डेकोरम एस्ट” युद्ध की व्यर्थता बताती है। यह युद्ध हमें शांति, कूटनीति और सह-अस्तित्व की शिक्षा देता है।
स्रोत: विकिपीडिया (https://en.wikipedia.org/wiki/World_War_I), ब्रिटैनिका, इतिहासकार बारबरा टचमैन (“द गन्स ऑफ अगस्त”), जॉन कीगन (“द फर्स्ट वर्ल्ड वॉर”)
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918): 50 MCQ प्रश्नोत्तरी
प्रत्येक प्रश्न के नीचे “उत्तर दिखाएँ” बटन दबाएँ। सभी उत्तर एक साथ देखने के लिए नीचे बटन हैं।







