Indian National Movement in Hindi | भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 से 1947 तक

By Santosh kumar

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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian National Movement) भारत और विश्व इतिहास की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में से एक है। यह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से शुरू होकर 1947 में भारत की स्वतंत्रता तक चला। इस आंदोलन ने न केवल ब्रिटिश साम्राज्यवाद को चुनौती दी, बल्कि गांधीवादी अहिंसा, क्रांतिकारी संघर्ष, किसान-मजदूर आंदोलनों और महिलाओं की भागीदारी जैसे विविध आयामों को शामिल किया।

यह लेख 1857 से 1947 तक के प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों की समयरेखा, प्रमुख नेताओं, घटनाओं, कारणों, परिणामों और उनके दीर्घकालिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। UPSC, SSC, राज्य लोक सेवा परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए यह एक संपूर्ण अध्ययन सामग्री प्रस्तुत करता है।

Indian National Movement in Hindi | भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 से 1947 तक

Table of Contents

Indian National Movement: स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1757 की प्लासी और 1764 के बक्सर की लड़ाई से बंगाल में अपनी जड़ें जमाईं। धीरे-धीरे 1857 तक कंपनी का शासन सम्पूर्ण भारत पर अपनी जड़ें जमा चुका था, लेकिन आर्थिक शोषण, सांस्कृतिक हस्तक्षेप (जैसे सती प्रथा उन्मूलन, विधवा विवाह) और सैनिक असंतोष ने विद्रोह की आग भड़का दी।

1857 का विद्रोह आधुनिक स्वतंत्रता आंदोलन का प्रारंभिक चरण था, जिसने राष्ट्रीय चेतना को जगाया। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना (1885) ने संगठित आंदोलन को गति दी। आंदोलन को तीन चरणों में बांटा जा सकता है: उदारवादी चरण (1885-1905), उग्रपंथी चरण (1905-1918) और गांधीवादी चरण (1919-1947)।

1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (सिपाही विद्रोह)

सबसे पहले हम भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बारे में संछिप्त जानकारी प्राप्त करते हैं-

  • प्रारम्भ की तिथि: 10 मई 1857 (मेरठ से प्रारंभ)।
  • क्रांति का कारण: एनफील्ड राइफल के कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी का उपयोग (धार्मिक भावनाओं का अपमान), दलित सैनिकों का भेदभाव, कम वेतन, डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स (गोद निषेध नीति) से राज्यों का विलय।
  • प्रमुख नेता: मंगल पांडे (बैरकपुर), रानी लक्ष्मीबाई (झांसी), तात्या टोपे, नाना साहब (कानपुर), बहादुर शाह जफर (दिल्ली में सम्राट घोषित)।
  • मुख्य केंद्र: दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, झांसी, बिहार।
  • परिणाम: विद्रोह कुचल दिया गया, लेकिन 1858 में कंपनी शासन समाप्त होकर ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष शासन शुरू हुआ (गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858)।
  • महत्व: पहला संगठित राष्ट्रीय विद्रोह; हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक। वी.डी. सावरकर ने इसे ‘प्रथम स्वतंत्रता संग्राम‘ कहा।

आदिवासी विद्रोह: स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी वीरगाथाएँ (1855–1922)

ब्रिटिश नीतियों का सबसे पहला शिकार आदिवासी समुदाय हुआ जिसने (जंगल कानून, लगान, जबरन मजदूरी) आदिवासियों को विद्रोह के लिए मजबूर किया। ये विद्रोह राष्ट्रीय चेतना की प्रारम्भिक जड़ें थे।

विद्रोहवर्षक्षेत्रनेताकारणपरिणाम
संथाल विद्रोह 1855–56झारखंड–बंगालसिदो-कान्हू, चाँद-भैरवमहाजनों द्वारा शोषण, जमींदारी15,000 संथाल मारे गए; संथाल परगना जिला बना
भील विद्रोह1817–19, 1840खानदेशसेवारामब्रिटिश सेना में भर्ती जबरनदबाया गया; भील कोर गठित
मुंडा उलगुलान (बिरसा मुंडा विद्रोह )1899–1900छोटानागपुरबिरसा मुंडा (“धरती आबा”)जंगल के अधिकार छीनेबिरसा गिरफ्तार, जेल में मृत्यु; छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908
तमर विद्रोह ( तमाड़)1913–14चंद्रपुरगुंडा धुरजंगल बंददबाया गया
गोंड विद्रोह1940–41आदिलाबादरामजी गोंडजंगल सत्याग्रहजंगल अधिकार मिले

UPSC नोट: बिरसा मुंडा को “आदिवासी गांधी” कहा जाता है। इन विद्रोहों ने “जल-जंगल-जमीन” का नारा दिया, जो आज भी प्रासंगिक है।


स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन (1905–1911): पहला जन-आंदोलन

  • पृष्ठभूमि: लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन (16 अक्टूबर 1905) → हिंदू-मुस्लिम एकता को कमजोर करने की नीति।
  • प्रमुख नेता: लाल-बाल-पाल (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्रा पाल), रवींद्रनाथ टैगोर, अरविंद घोष
  • कार्यक्रम:
    1. विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार (मैनचेस्टर से बना कपड़ा जलाया)
    2. स्वदेशी उद्योग प्रोत्साहन (बंगाल केमिकल, टाटा आयरन)
    3. राष्ट्रीय शिक्षा (बंगला भाषा विद्यालय, नेशनल कॉलेज)
    4. राखी बंधन उत्सव (28 सितंबर 1905) – टैगोर द्वारा चलाया गया।
स्वदेशी का प्रभाव
विदेशी कपड़ा आयात: 1905 में 100 करोड़ → 1910 में 60 करोड़
स्वदेशी मिलें: 1900 में 198 → 1914 में 364
  • परिणाम:
    • विभाजन रद्द (1911)
    • दिल्ली भारत की राजधानी घोषित
    • कांग्रेस में उग्रवादी-उदारवादी विभाजन (सूरत की फूट 1907)

गदर आंदोलन (1913–1917): प्रवासी क्रांति

  • स्थापना: 1913, सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका)हर दयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा
  • मुखपत्र: “गदर” (उर्दू में “विद्रोह”)
  • उद्देश्य: प्रथम विश्व विश्व युद्ध में ब्रिटेन कमजोर → भारत में सशस्त्र क्रांति।
  • घटनाएँ:
    • कोमागाटा मारू घटना (1914): 376 भारतीय यात्री कनाडा से लौटाए गए।
    • गदरियों की वापसी: हजारों सिख-पंजाबी भारत लौटे।
    • लाहौर षडयंत्र केस (1915): 42 गदरी फाँसी, 100+ आजीवन कारावास।
  • महत्व: पहला प्रवासी स्वतंत्रता आंदोलन; भगत सिंह पर प्रभाव

उदारवादी चरण (1885-1905): कांग्रेस की स्थापना और प्रारंभिक मांगें

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना: 28 दिसंबर 1885, बॉम्बे (ए.ओ. ह्यूम द्वारा)। प्रथम अधिवेशन: डब्ल्यू.सी. बनर्जी (अध्यक्ष), 72 प्रतिनिधि।
  • प्रमुख नेता: दादाभाई नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता।
  • मुख्य आंदोलन:
  • इल्बर्ट बिल विवाद (1883): यूरोपीय और भारतीयों के लिए समान न्याय की मांग।
  • आर्थिक आलोचना: दादाभाई नौरोजी की ‘ड्रेन थ्योरी‘ (भारत से धन का निकास)।
  • उपलब्धियां: ICS परीक्षा में भारतीयों की भागीदारी, councils में प्रतिनिधित्व।
  • सीमाएं: प्रार्थना पत्र की नीति; केवल शिक्षित वर्ग तक सीमित।

उग्रवादी चरण (1905-1918): स्वदेशी और विभाजन विरोध

  • बंगाल विभाजन (1905): लॉर्ड कर्जन द्वारा; हिंदू-मुस्लिम विभाजन की नीति।
  • स्वदेशी आंदोलन: बहिष्कार विदेशी वस्तुओं का; रवींद्रनाथ टैगोर, अरविंद घोष, बिपिन चंद्रा पाल, लाला लाजपत राय (लाल-बाल-पाल)।
  • मुस्लिम लीग की स्थापना (1906): ढाका में; अलगाववादी प्रवृत्ति।
  • सूरत अधिवेशन (1907): कांग्रेस में उदारवादी-उग्रवादी विभाजन।
  • प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव (1914-1918): होम रूल लीग (एनी बेसेंट, बाल गंगाधर तिलक – 1916)।
  • लखनऊ समझौता (1916): कांग्रेस-लीग एकता; तिलक और जिन्ना।
  • क्रांतिकारी गतिविधियां: गदर पार्टी (1913, अमेरिका), अनुशीलन समिति, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (1924 में)।

गांधीवादी चरण (1919-1947): जन आंदोलन का युग

Quit India Movement 1942 in Hindi, भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व और नारा

महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लौटने (1915) के बाद आंदोलन जन-जन तक पहुंचा। अहिंसा और सत्याग्रह मुख्य हथियार।

प्रमुख आंदोलन:

  1. चंपारण सत्याग्रह (1917): बिहार में नील किसानों के लिए; गांधी का पहला भारतीय सत्याग्रह। राजकुमार शुक्ल की भूमिका।
  2. खेड़ा सत्याग्रह (1918): गुजरात में लगान माफी; सरदार पटेल।
  3. अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918): मजदूरों के लिए; अनुसुइया सराबाई।
  4. असहयोग आंदोलन (1920-1922):
  • कारण: रॉलेट एक्ट (1919), जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919, जनरल डायर – 379 मृत, आधिकारिक; उधम सिंह ने बदला लिया)।
  • कार्यक्रम: विदेशी वस्त्र बहिष्कार, स्कूल-कचहरी त्याग, खादी प्रचार।
  • चौरी-चौरा कांड (1922): हिंसा से आंदोलन वापस।
  • महत्व: पहला जन आंदोलन; महिलाओं की भागीदारी (सरोजिनी नायडू)।
  1. साइमन कमीशन विरोध (1927): ‘गो बैक साइमन’; लाला लाजपत राय की मृत्यु (लाठी चार्ज)।
  2. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-1934):
  • नमक सत्याग्रह/दांडी मार्च (12 मार्च-6 अप्रैल 1930): 24 दिन, 385 किमी; 78 साथी।
  • गांधी-इरविन समझौता (1931): कैदियों की रिहाई।
  • महत्व: महिलाओं का बड़ा योगदान (कमला नेहरू, विजयलक्ष्मी पंडित)।
  1. गोलमेज सम्मेलन (1930-1932): तीन सम्मेलन; गांधी दूसरे में।
  2. भारत छोड़ो आंदोलन (1942):
  • प्रस्ताव: 8 अगस्त 1942, बॉम्बे; ‘करो या मरो’।
  • नेता गिरफ्तार: गांधी, नेहरू; भूमिगत: जयप्रकाश नारायण, अरुणा आसफ अली।
  • परिणाम: दबाया गया, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन कमजोर।
  1. क्रांतिकारी आंदोलन:
  • भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव (1929): लाहौर षडयंत्र केस; असेंबली बम कांड।
  • चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस: आजाद हिंद फौज (INA, 1942); ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’।
  • INA ट्रायल (1945): रेड फोर्ट; प्रेरणा स्रोत।
  1. किसान और मजदूर आंदोलन: तेभागा (बंगाल), तेलंगाना (1946)।

क्रांतिकारी आंदोलनों का विस्तार

संगठनस्थापनानेतामुख्य घटना
अनुशीलन समिति1902, ढाकाप्रफुल्ल चाकीअलीपुर बम कांड (1908)
युगांतर1906, कोलकाताबारींद्र घोषमुजफ्फरपुर हत्या (1908)
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA)1924रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्लाहकाकोरी कांड (1925)
HSRA1928भगत सिंह, चंद्रशेखर आजादलाहौर षडयंत्र (1929), सांडर्स हत्या

गांधी युग: जन आंदोलनों का स्वर्णिम काल

आंदोलनवर्षमुख्य घटनापरिणाम
चंपारण1917नील किसानटिंकाथिया प्रथा समाप्त
खेड़ा1918लगान माफीसरदार पटेल का उदय
असहयोग1920–22चौरी-चौरावापसी
दांडी मार्च1930नमक कानून भंगगांधी-इरविन पैक्ट
भारत छोड़ो1942करो या मरोभूमिगत आंदोलन

आजाद हिंद फौज (INA) और नौसेना विद्रोह

  • INA: सुभाष चंद्र बोस → “दिल्ली चलो”, “जय हिंद”
  • INA ट्रायल (1945): प्रेम सहगल, शाहनवाज, गुरबख्श → राष्ट्रीय एकता
  • नौसेना विद्रोह (1946): आर.के.एस. कराची → 20,000 नाविक → ब्रिटेन डर गया

महिलाएँ, दलित, किसान, मजदूर: समावेशी संघर्ष

वर्गयोगदान
महिलाएँअरुणा आसफ अली (झंडा फहराया), सुचेता कृपलानी, विजयलक्ष्मी पंडित
दलितअम्बेडकर → पूना पैक्ट (1932)
किसानबारदोली सत्याग्रह (1928), तेभागा (1946)
मजदूरअहमदाबाद हड़ताल (1918), कानपुर षडयंत्र (1924)

समयरेखा सारणी: 1857–1947 (UPSC टॉपिक-वाइज)

वर्षघटनाप्रकार
1855संताल हूलआदिवासी
1857प्रथम स्वतंत्रता संग्रामराष्ट्रीय
1899मुंडा उलगुलानआदिवासी
1905स्वदेशी आंदोलनजन-आंदोलन
1913गदर पार्टीप्रवासी क्रांति
1917चंपारणगांधीवादी
1930दांडी मार्चसविनय अवज्ञा
1942भारत छोड़ोअंतिम जन-आंदोलन
1945INA ट्रायलसशस्त्र संघर्ष
1947स्वतंत्रतापरिणाम

अंतिम चरण: आजादी और विभाजन (1945-1947)

  • कैबिनेट मिशन (1946): अंतरिम सरकार; नेहरू अध्यक्ष।
  • प्रत्यक्ष संघर्ष दिवस (16 अगस्त 1946): कलकत्ता दंगे।
  • माउंटबेटन प्लान (3 जून 1947): विभाजन।
  • स्वतंत्रता अधिनियम (18 जुलाई 1947): 15 अगस्त 1947 को आजादी; पाकिस्तान 14 अगस्त।
  • प्रमुख नेता: जवाहरलाल नेहरू (प्रथम PM), सरदार पटेल (गृह मंत्री), डॉ. राजेंद्र प्रसाद (राष्ट्रपति)।
  • परिणाम: 5 लाख मृत (दंगे); शरणार्थी समस्या।

प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों की सूची (समयरेखा सारणी)

वर्षआंदोलन/घटनाप्रमुख नेतामुख्य विशेषता/परिणाम
1857प्रथम स्वतंत्रता संग्राममंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाईक्राउन शासन प्रारंभ
1885INC स्थापनाए.ओ. ह्यूम, डब्ल्यू.सी. बनर्जीसंगठित राजनीति
1905बंगाल विभाजन एवं स्वदेशीलाल-बाल-पालबहिष्कार आंदोलन
1917-18चंपारण, खेड़ा, अहमदाबादगांधी, पटेलसत्याग्रह की शुरुआत
1919जलियांवाला बागडायरअसहयोग की नींव
1920-22असहयोग आंदोलनगांधीजन भागीदारी
1930सविनय अवज्ञा एवं दांडी मार्चगांधीनमक कानून भंग
1942भारत छोड़ोगांधी, नेहरू‘करो या मरो’
1942-45आजाद हिंद फौजसुभाष चंद्र बोसINA ट्रायल
1947स्वतंत्रता एवं विभाजननेहरू, जिन्ना15 अगस्त आजादी

महिलाओं और अन्य वर्गों की भूमिका

  • महिलाएं: रानी लक्ष्मीबाई, मैडम कामा, दुर्गा भाभी, कस्तूरबा गांधी, अरुणा आसफ अली।
  • दलित: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (पूना पैक्ट 1932)।
  • मुस्लिम: मौलाना अबुल कलाम आजाद, खान अब्दुल गफ्फार खान (खुदाई खिदमतगार)।

निष्कर्ष: स्वतंत्रता आंदोलन का विरासत

1857 से 1947 तक का सफर शोषण से मुक्ति की गाथा है। गांधी की अहिंसा ने विश्व को नैतिक बल सिखाया, जबकि क्रांतिकारियों ने बलिदान की मिसाल कायम की। आजादी के बाद भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना (26 जनवरी 1950)। यह आंदोलन हमें एकता, सहिष्णुता और संघर्ष की प्रेरणा देता है।

संदर्भ:

  • NCERT इतिहास पुस्तकें,
  • बिपिन चंद्रा की ‘India’s Struggle for Independence’,
  • स्पेक्ट्रम की ‘Modern India’।

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